वैदिक साहित्य का परिचय देते हुए इसका महत्व समझाइये?

उत्तर -वैदिक साहित्य मूलतः धार्मिक ग्रंथ है। मूल वेद अथवा संहिताएँ चार हैं, परंतु वैदिक साहित्य में वेद संहिता, ब्राह्मण ग्रंथ,आरण्यक एवं उपनिषद् को सम्मिलित किया गया है। वैदिक साहित्य को ‘श्रुति साहित्य‘ भी कहा जाता है।

उपनिषद्, ‘उप’ का अर्थ है समीप ‘नि’ का अर्थ निष्ठापूर्वक बैठना अर्थात ज्ञान प्राप्ति हेतु निष्ठापूर्वक गुरू के समीप बैठना। उपनिषद् ज्ञानमार्गी रचनाएँ है। भारतीय दार्शनिक चिन्तन का आधार उपनिषद् ही हैं। वैदिक साहित्य का अंतिम भाग होने के कारण उपनिषदों को वेदान्त कहा जाता है। वेदांत दर्शन के तीन प्रस्थान है- उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र एवं भगवतगीता। जिन्हें सम्मिलित रूप से ‘प्रस्थान त्रयी’ जाता है। भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ को मुंडकोपनिषद से लिया गया है।