ताम्राश्म काल में महाराष्ट्र के लोग मृतकों के शरीर को फर्श के नीचे किस तरह रखकर दफनाते थे?

(a) उत्तर से दक्षिण की ओर
(b) पूर्व से पश्चिम की ओर
(c) दक्षिण से उत्तर की ओर
(d) पश्चिम से पूर्व की ओर

Ans: [a) उत्तर से दक्षिण की ओर

व्याख्या: भारत में सिन्ध क्षेत्र के बाहर अनेक विकसित ग्रामीण संस्कृतियों के दर्शन होते हैं। इन्हे ताम्रपाषाणिक कहा गया है क्योंकि इन संस्कृतियों के लोग पत्थर के साथ-साथ तांबे की वस्तुओं का प्रयोग करते थे। ताम्न पाषाणिक संस्कृति के सबसे अधिक स्थल पश्चिमी महाराष्ट्र में मिलते है। गोदावरी की सहायक प्रवरा नदी के बायें तट पर स्थित जोर्वे इसका प्रतिनिधि स्थल है अतः इसे जोर्वे संस्कृति भी कहते हैं। इसकी सामान्य तिथि ई.पू. 1400 से 1000 के बीच है। यहाँ की एक प्रमुख विशेषता यह है कि बहुत सारे शवाथान कलश में किये गये हैं। ये कलश घरों के फर्श के नीचे उत्तर-दक्षिण दिशा में रखे गये हैं।

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