निम्नलिखित में से जैन धर्म का कौन-सा “त्रिरत्न” नहीं है?

[1] सही विश्वास
[2] सही ज्ञान
[3] सही दृष्टि
[4] सद् आचरण

उत्तर: (3] सही दृष्टि

व्याख्या: जैन धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव अपने पूर्व संचित कार्यों के अनुसार ही शरीर धारण करता है। मोक्ष के लिये तीन साधन बताए गए हैं: (1) सम्यक दर्शन-जैन धर्म के उपदेशों में दृढ़ विश्वास ही सम्यक दर्शन या श्रद्धा है। (2) सम्यक ज्ञान-जैन धर्म एवं उसके सिद्धांतों का ज्ञान ही सम्यक ज्ञान है। (3) सम्यक् चरित्र-जो कुछ भी जाना जा चुका है और सही माना जा चुका है इसे कार्यरूप में परिणत करना ही सम्यक् चरित्र है। इन तीनों को जैन धर्म में त्रिरत्न की संज्ञा दी जाती है।

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