राज्यपाल का पद किस देश से लिया गया है?

(A) स्विटजरलैण्ड से
(B) कनाडा से
(C) आयरलेण्ड से
(D) संयुक्त राज्य अमेरिका से

Ans: (B) कनाडा से

व्याख्या: राज्यपाल का पद कनाडा देश से लिया गया है। संविधान के छोटे वाक्य अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्य का विभाजन का के बारे में बताया गया है. राज्य की कार्यपालिका में राज्यपाल मुख्यमंत्री मंत्री परिषद पर राज्य के महाधिवक्ता शामिल होते हैं। इस प्रकार राज्य में उपराज्यपाल का कोई कार्यालय नहीं होता जैसे कि केंद्र में उपराष्ट्रपति का।

राज्यपाल किसी भी राज्य का कार्यकारी प्रमुख अर्थात संवैधानिक मुखिया होता. राज्यपाल, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्यकर्ता है इस तरह राज्यपाल कार्यालय दोहरी भूमिका निभाता है. सामान्य रूप से प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होता है लेकिन सातवें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुसार एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है.

राज्य के राज्यपालों की केंद्र द्वारा नियुक्ति के प्रावधान को कनाडा से लिया गया है. कनाडा के संविधान से सशक्त केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना, केंद्र द्वारा राज्य के राज्यपालों की नियुक्ति और उच्चतम न्यायालय का परामर्शी न्याय निर्णय आदि को कनाडा के संविधान से लिया गया.

राज्य के राज्यपालों की केन्द्र द्वारा नियुक्ति के प्रावधान को लिया गया है?

(A) स्विटजरलैण्ड से
(B) आयरलेण्ड से
(C) कनाडा से
(D) संयुक्त राज्य अमेरिका से

Ans: (C) कनाडा से

राज्य के राज्यपालों की केंद्र द्वारा नियुक्ति के प्रावधान को कनाडा से लिया गया है कनाडा के संविधान से सशक्त केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना, केंद्र द्वारा राज्य के राज्यपालों की नियुक्ति और उच्चतम न्यायालय का परामर्शी न्याय निर्णय आदि को करण के संविधान से लिया गया.

भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौनसा अनुच्छेद ‘कुछ मामलों में गिरफ्तारी और निरुद्ध के खिलाफ सुरक्षा ‘ प्रदान करता है?

(A) 22
(B) 20
(C) 21
(D) 19

Ans: अनुच्छेद 22

व्याख्या– अनुच्छेद 22 में ‘कुछ मामलों में गिरफ्तारी और निरुद्ध के खिलाफ सुरक्षा ‘ प्रदान करता है , विशेष रूप से गिरफ्तारी के आधार सूचित किए जाने, अपनी पसंद के एक वकील से सलाह करने, गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर एक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने और मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना उस अवधि से अधिक हिरासत में न रखे जाने का अधिकार।

संविधान से क्या आशय है ?

संविधान से आशय है कि संविधान एक दस्तावेज है जो देश की संप्रभुता की स्वतंत्रता को दर्शाता है या उसका प्रतीक है। संविधान एक विशेष दस्तावेज है जो सरकार के प्रमुख अंगों अर्थात् विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका और उनके बीच संबंधों की भूमिका और कार्यों को निर्धारित करता है।
संविधान विश्वासों और कानूनों की एक प्रणाली है जिसके द्वारा एक देश/राज्य शासित होता है। ‘यह विशेष कानूनी पवित्रता वाला एक दस्तावेज है जो राज्य की सरकार के अंगों के ढांचे और प्रमुख कार्यों को निर्धारित करता है और उन अंगों के संचालन को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों की घोषणा करता है’।
संविधान को सरकार के लिए एक ढांचा प्रदान करने वाले कानूनी नियमों के संग्रह के रूप में परिभाषित किया गया है। यह प्रमुख विश्वासों और हितों को दर्शाता है या परस्पर विरोधी विश्वासों और हितों के बीच कुछ समझौता करता है, जो समाज की विशेषताएं हैं। यह लोगों की आस्था और आकांक्षाओं का दस्तावेज है।
संविधान अपनी शक्ति और अधिकार सीधे लोगों से प्राप्त करता है। संविधान उस देश का मौलिक और सर्वोच्च कानून है जिसे कानूनी मान्यता प्राप्त है। इसलिए, यह संसद द्वारा बनाए गए सभी कानूनों से ऊपर है।

संविधान निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन करें

9 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा की प्रथम बैठक हुई जिसमें सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया। सभा के सदस्यों ने रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। 11 दिसम्बर 1946 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया। 13 दिसम्बर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने ‘उद्देश्य प्रस्ताव‘ प्रस्तुत किया जिसमें संविधान के आधारभूत सिद्धांतों और लक्ष्यों का उल्लेख किया गया था। उद्देश्य प्रस्ताव पेश करते हुए नेहरू ने कहा ‘मैं आपके सामने जो प्रस्ताव प्रस्तुत कर रहा हूं उसमें हमारे उद्देश्यों की व्याख्या की गई, योजना की रूपरेखा दी गई और बताया गया है कि हम किस रास्ते पर चलने वाले हैं।” 22 जनवरी 1947 का संविधान सभा ने सर्वसम्मपति से उद्देश्य प्रस्ताव को पास किया जिसके पश्चात् संविधान निर्माण का रास्ता प्रशस्त हो गया।

उद्देश्य प्रस्ताव की रोशनी में संविधान के विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श के लिए संविधान सभा ने अनेक समितियों को नियुक्त किया जैसेः

  1. संघ संविधान समिति
  2.  प्रांतीय संविधान समिति
  3.  संघ शक्ति और समिति मूल अधिकारों, अल्पसंख्यकों, आदि से संबंधित परामर्श समिति
  4.  प्रारूप समिति इत्यादि।

संविधान निर्माण की प्रक्रिया

30 जून 1947 को ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रकाशित की गई योजना के अनुसार देश का विभाजन स्वीकार कर लिया गया। विभाजन के उपरांत संविधान सभा की सदस्य संख्या घटकर 324 रह गई।

29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने प्रारूप समिति की नियुक्ति की। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया। इस समिति का कार्य यह था कि वह संविध न सभा की परामर्श शाखा द्वारा तैयार किए गए संविधान का परीक्षण करे और फिर उसे संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत करे। अक्टबर 1947 में सांविधानिक परामर्शदाता बी.एन. राव के निर्देशन में संविधान सभा के सविचालय की परामर्श शाखा ने संविधान का पहला प्रारूप तैयार कर लिया। प्रारूप समिति ने फरवरी 1948 में संविधान का प्रारूप संविधान सभा के अध्यक्ष के सुपुर्द कर दिया।

प्रारूप-संविधान के प्रकाशित होने के बाद उसमें संशोध न के बहुत से सुझाव प्राप्त हुए। एक विशिष्ट समिति ने इन सुझावों पर विचार-विमर्श करने के उपरांत प्रारूप-संविधान का पुनिरीक्षण संस्करण प्रकाशित किया। 15 नवम्बर 1948 से प्रारूप-संविधान पर विचार प्रारंभ हुआ, इस वाचन से लगभग 7,635 संशोधन प्रस्तुत किए गए जिनमें 2,473 संशोधनों पर सविस्तार विचार किया गया। 26 नवम्बर 1949 को संविधान अंतिम रूप से संविधान सभा द्वारा पारित किया गया और 26 जनवरी 1950 को उसे लागू किया गया। इसी दिन संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत की अंतरिम संसद का रूप धारण किया।

भारतीय संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। संविधान के प्रारूप पर 114 दिनों तक चर्चा हुई। 26 नवम्बर 1949 को संविधान अंगीकृत हुआ और संविधान के कुछ अनुच्छेद उसी दिन से लागू कर दिए गए जबकि संपूर्ण संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। 1930 में इसी तारीख (26 जनवरी) को भारतीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वतंत्रता का संकल्प लिया था।