भारतीय संविधान का अनुच्छेद 368 संबंधित है

(A) आपातकालीन प्रावधान
(B) प्राथमिक शिक्षा का अधिकार
(C) सूचना का अधिकार
(D) संशोधन प्रक्रिया

उत्तर- [4] संशोधन प्रक्रिया

व्याख्या : भारत के संविधान का अनुच्छेद 368 संशोधन प्रक्रिया से संबंधित है. यह संसद को उसमें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किसी भी प्रावधान को जोड़ने, बदलने या निरस्त करने के माध्यम से संविधान में संशोधन करने का अधिकार देता है, जो सामान्य कानून की प्रक्रिया से अलग है। भारतीय संविधान विश्व का सर्वाधिक विस्तृत एवं लिखित संविधान हैं । साथ इसकी विशेषता यह है कि इसमें नम्यता और अनम्यता दोनों का अद्भुत मिश्रण है |संविधान के भाग -20 के अंतर्गत अनुच्छेद- 368 में भारतीय संसद को ( विशेष बहुमत व आधे राज्यों विधानमण्डलों के अनुसमर्थन से ) संविधान संशोधन की शक्ति प्राप्त है ।
भारतीय संविधान में संशोधन तीन प्रकार की प्रक्रिया से किया जाता है साधारण बहुमत से किए जाने वाली संशोधन विधि में संसद के दोनों सदनों के उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के आधे से अधिक की सहमति आवश्यक है जैसे अनुच्छेद 2, 3, 4, 75, 97, 100 ,105 (3), 106 ,169 293 (अ) आदि में परिवर्तन ऐसे उपबंधों का संशोधन अनुच्छेद -368 के अंतर्गत नहीं आता है ।
विशेष बहुमत से संशोधन के अंतर्गत ‘संघीय ढांचे’से संबंधित विषयों को छोड़कर अन्य जैसे -मूल अधिकार, नीति -निर्देशक तत्व आदि में संशोधन अनुच्छेद 368 के अंतर्गत कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो -तिहाई बहुमत होता है ।
अनुच्छेद 368 (2)के अंतर्गत किए गए संशोधन का संबंध ‘संघात्मक ढांचे से हैं जिसमें विशेष बहुमत के साथ आधे राज्यों की विधानमंडलों का समर्थन (Ratification) होना चाहिए । जैसे -अनुच्छेद 54, 55, 73, 162, 241,भाग 5 के अध्याय 4, भाग 6 के अध्याय 5, अनुसूची 4 तथा अनुच्छेद 368 आदि के विषय में ।
संसद ‘प्रस्तावना तथा मूल अधिकारों’ सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है ।परंतु संविधान के आधारभूत ढांचे (Basic structure) में संशोधन नहीं कर सकती ।

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