अमरावती मूर्तिकला शैली से संबंध विशेषताओं को लिखिए?

 

उत्तर– मौर्योत्तर काल में दक्षिण भारत में सातवाहनों का केंद्रीकृत एवं आर्थिक रूप से समृद्ध साम्राज्य विद्यमान था ।अमरावती शैली पूर्णतया स्वदेशी शैली है जिसका विकास भारत के दक्षिण भाग (कृष्णा- गोदावरी क्षेत्र) में सातवाहन शासकों के संरक्षण में हुआ। अमरावती शैली अपने भव्य उभारदार भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं ।जो विश्व में कलात्मक मूर्ति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इस शैली के प्रमुख केंद्र अमरावती,जग्गय्यापेट ,नागार्जुनकोंडा ,भट्टिप्रोलू(आंध्र प्रदेश) है ।। अमरावती शैली की विशेषताओं में, मूर्तियों के निर्माण में सफेद संगमरमर का प्रयोग, प्रमुख रूप से बौद्ध आदर्श एवं यथार्थ का मिश्रण , मूर्तियों का जातक कथाओं से प्रेरित होना आदि हैं। कुषाण मूर्तियों में जहां आभूषणों की अधिकता है वहीं अमरावती शैली में आभूषणों की न्यूनता तथा सुरुचि की व्यापकता है। गांधार एवं मथुरा मूर्ति शैली में जहाँ स्थिर आकृतियों पर बल दिया गया है वहीं अमरावती शैली की मूर्तियां ‘गतिशील’ है। अमरावती मूर्तिकला की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें धर्म एवं आध्यात्मिकता की अपेक्षा ‘लोक जनजीवन की सुंदर अभियुक्ति की गई है।