आरंभिक वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था आधारित थी:?

[1] शिक्षा पर
[2] जन्म पर
[3] व्यवसाय पर
[4] प्रतिभा पर

उत्तर: (3] व्यवसाय पर

व्याख्या: ऋग्वैदिक कालीन समाज प्रारम्भ में वर्ग-विभेद से रहित था। सभी व्यक्ति जन के सदस्य समझे जाते थे तथा सबकी समान सामाजिक प्रतिष्ठा थी। ऋग्वेद में नये शब्द ‘वर्ण’, रंग के अर्थ में तथा कहीं-कहीं व्यवसाय-चयन के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। प्रारम्भ में हम तीन वर्ण का उल्लेख पाते हैं-ब्रह्म, क्षत्र तथा विश। ये वर्ण भी कार्य (व्यवसाय) के आधार पर थे। ब्रह्म- (यज्ञ कराने के लिए), क्षत (हानि से रक्षा करने वाले), विश (शेष जन)

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