‘आजीवक संप्रदाय’ एक संप्रदाय था:?

[1] बुद्ध का समसामयिक
[2] बौद्धों से अलग हुई एक शाखा
[3] चार्वाक द्वारा स्थापित संप्रदाय
[4] शंकराचार्य द्वारा स्थापित संप्रदाय

उत्तर: (1] बुद्ध का समसामयिक

व्याख्या: बुद्ध का समसामयिक ‘आजीवक’ भी एक धार्मिक संप्रदाय था। नई विचारधाराओं से प्रभावित होकर अनेक नए संप्रदायों का उदय हुआ, जिसने कर्मकांडी वैदिक धर्म का विरोध किया। इन संप्रदायों में 6 संप्रदाय महत्वपूर्ण थे। पूरण कश्यप नामक ब्राह्मण ‘अक्रियावाद’ (कर्मों का कोई भी फल नहीं मिलता है) में विश्वास करता था। इसी से आगे सांख्यवाद का उदय हुआ। मक्खलि गोशाल ने ‘आजीवक’ संप्रदाय (अक्रियावाद तथा नियतिवाद) की स्थापना की। अजित केशकम्बलिन् ‘भौतिकवादी’ (यदृच्छवादी) था। इसी से लोकायत ‘या चार्वाक के दर्शन का विकास हुआ। संजय वेलठ्ठपुत्त’ अनिश्चयवादी ‘दर्शन का समर्थक था। पकुध कच्चायन पुनर्जन्म तथा कर्म को नहीं मानता था। निगण्ठ नाथपुत्र (महावीर स्वामी) ने जैन दर्शन को बढ़ाया। महात्मा बुद्ध ने बौद्ध दर्शन को बढ़ाया।

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