रैयतवाड़ी की प्रमुख विशेषताएं क्या थी?

उत्तर- कृषकों के साथ प्रत्यक्ष रूप से व्यक्तिगत भू-राजस्व समझौते को रैय्यतवाड़ी व्यवस्था कहा गया। इसके अंतर्गत प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार को भूस्वामी स्वीकार किया गया एवं भू- राजस्व जमा कराने का दायित्व प्रत्यक्ष रूप से कृषकों को सौंपा गया। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कंपनी व कृषकों के मध्य के बिचौलिए वर्ग (जमींदार) को समाप्त करना था। अंग्रेज अधिकारी थॉमस मुनरो व कर्नल रीड को रैय्यतवाड़ी व्यवस्था का जनक माना जाता है ।1793 ई.में यह व्यवस्था कर्नल रीड द्वारा बारामहल जिले में लागू की गई थी। रैय्यतवाड़ी व्यवस्था के अंतर्गत ब्रिटिश भू-भाग का 51% हिस्सा शामिल किया गया। रैय्यतवाड़ी व्यवस्था को 30 वर्ष के लिए लागू किया गया व इसकी दर 1/3 निर्धारित की गयी थी।