महाकाव्य महाभारत का परिचय देते हुए इसके दार्शनिक पक्ष ‘भगवद गीता’ का वर्णन कीजिए?

 

उत्तर– महाभारत की रचना’ महर्षि वेदव्यास’ ने की थी। जय संहिता(8800 श्लोक) तथा भारत(24000) इसके पूर्व नाम है। गुप्त काल में श्लोकों की संख्या एक लाख होने के पश्चात महाभारत कहा जाने लगा। महाभारत में अट्ठारह पर्व है, जिसमें ‘शांति पर्व’ सबसे बड़ा पर्व है। इसमें शक, यवन, हूण पारसीक का आदि जातियों का उल्लेख है ।महाभारत को पंचमवेद कहा गया है।’ आश्वलायान’ गृह सूत्र में महाभारत का सर्वप्रथम उल्लेख हैं।

भगवदगीता महाभारत के छठवें पर्व अर्थात भीष्म पर्व का ही भाग हैं भगवदगीता को ‘स्मृति प्रस्थान’ भी कहा जाता है। यह एक सार्वभौमिक धार्मिक ग्रंथ है जिसकी शिक्षाएं वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं। भगवदगीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को एक योद्धा एवं राजा के कर्तव्यों को समझाने के क्रम में विभिन्न यौगिक एवं वेदांतिक दर्शनों का उदाहरण दिया है।

अन्य अर्थों में भागवदगीता, महाभारत का दार्शनिक विस्तार हैं। जिसमें कर्म की प्रधानता एवं आत्मा की अमरता के संबंध में विशद वर्णन है तथा भक्ति पर बल देते हुए ‘कर्म एवं योग’के समन्वय का विचार प्रस्तुत किया गया है।