जैन धर्म में ‘आत्मा’ संबंधी दृष्टिकोण को समझाइए?

 

उत्तर– जैन धर्म में ईश्वर की मान्यता नहीं है। यह अनीश्वरवादी धर्म है। जैन धर्म की मान्यता अनुसार संसार शाश्वत है किंतु इसकी सृष्टि का कारण ईश्वर नहीं है। किंतु यह दर्शन आत्मा में विश्वास करता है।

जैन धर्म के अनुसार आत्मा सभी वस्तुओं में विद्यमान हैं। जीव-जंतु, पेड़- पौधे तथा भौतिक वस्तुओं में भी आत्मा उपस्थित है। यह ‘अनेकात्मवाद’अथवा ‘आत्मा की बहुलता’ का सिद्धांत कहलाता है।

जैन दर्शन के अनुसार प्रत्येक जीव में दो तत्व सदैव विद्यमान रहते हैं- एक आत्मा और दूसरा आवृत करने वाला भौतिक तत्व (पुदगल)। जीव का परम लक्ष्य आत्मा को भौतिक तत्व (पुदगल) से मुक्त करना है। जो जीवन में भ्रम तथा विकार उत्पन्न करता है। आत्मा से भौतिक तत्वों के अलग होने पर ही निर्वाण का मार्ग प्रशस्त होता है।

जैन धर्म के अनुसार जीव से कर्म का अवशेष पूर्णत: समाप्त हो जाता है, तब वह मोक्ष की प्राप्ति(कैवल्य) कर लेता है।