अकबर के काल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण काल क्यों कहा जाता है?

 

उत्तर– मुगल काल में फारसी साहित्य के समान ही हिंदी साहित्य की भी उन्नति हुई। यद्यपि अकबर से पूर्व हिंदी साहित्य का विकास प्रारंभ हो चुका था और पद्मावत (जायसी) तथा मृगावती (कुतुबन )जैसे उच्च कोटी के ग्रंथों का प्रणयन हो चुका था। तथापि अकबर की सहिष्णु नीति से हिंदी साहित्य अत्यंत समृद्ध हुआ।

अकबर के दरबारी हिंदी कवियों में राजा टोडरमल ,राजा मानसिंह (मान प्रकाश की रचना), राजा भगवानदास, अब्दुर रहीम खानखाना (रहीम सतसई की रचना) कविराय बीरबल तथा नरहरी महापात्र (भक्ति रत्नाकर) आदि प्रसिद्ध थे।

समकालीन कवियों में रसखान (प्रेम वाटिका),सूरदास (सूरसागर),पद्म सुंदर (अक्षरशाही श्रृंगार दर्पण), नंददास (राम पंचाध्यायी), विट्ठलदास (चौरासी वैष्णव की वार्ता तथा मीराबाई ,केशवदास और अष्टछाप (कवि समूह) जैसे प्रसिद्ध हिंदी रचनाकार थे। अकबर के शासन काल में महान कवि तुलसीदास ने ‘रामचरित मानस'( अवधी) की रचना की, जिसे ‘जॉर्ज ग्रियर्सन’ ने हिंदुस्तान के करोड़ों लोगों की एकमात्र बाईबिल कहा है। विनय पत्रिका, कवितावली, दोहावली, गीतावली तुलसीदास जी की अन्य रचनाएं हैं।

अतः स्पष्ट है कि अकबर का शासन काल हिंदी साहित्य, विशेषकर ‘हिंदी कविता के लिए स्वर्ण काल था। इसलिए हम कह सकते हैं कि अकबर के काल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण काल कहा जाता है